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Ajeet

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@ ajeet
, Uttar Pradesh

प्रिय मित्रों सभी को सादर प्रणाम। मेरा नाम अजीत हे, मैं वर्तमान में चौधरी चरण सिंह यूनिवरसिटी मेरठ से हिन्दी साहित्य में M.A कर रहा हूं, में गाँव नया गाँव पोस्ट सिकंदराबाद जिला बुलंदशहर का निवासी हूँ | में अपने विचारों को साहित्य लाइव परिवार के माध्यम से लोगो तक पहुँचा रहा हूँ , जिससे की में साहित्य लाइव परिवार का आभारी हूँ | धन्यवाद साहित्य लाइव परिवार/

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My Articles

प्रिय दोस्त पर्दा ही इस तरह लगाया तुमने चेहरे पे में रह गया असमर्थ तुम्हें पहचानने में/ तुमने देखा मेने देखा फिर भी रह गया में अंजान read more >>
दो आते बच्चे सुबह मोहिनी मुस्कान किरणों में वह कहते और गाते देना माई एक रोटी / फटे कपड़ो वाले नंगे बदन वाले दो नन्हें बच्चे, वह कहते � read more >>
जाग रात के जुगनू चोर टिम - टिमाना अब छोड़ आ चले अब पश्चिम की और , देख बादलो का मचा हे सोर , चाँदनी का हे धरा पर ज़ोर जाग रात के जुगनू चोर / न read more >>
फिर भी अन्धेरे में था ना दिन का पता था ना रात का पता था एक तेरा ही सहारा था / जिस दिन में अकेला था उस दिन तेरे गाँव में मेला था दिन रात क read more >>
इस कदर ना तुम रूठा करो ये हंसी चाँद सी ये पलके गुलाब सी ये बदन पे चोटी साप सी. फिर भी इतनी खास हो तुम. रात की नींद हो तुम दिन की छाँव हो त� read more >>
इस कदर न बहा आशुओं को बेजुबान से इन कणो को कोई ना कोई होगा जानने वाला कोई ना कोई होगा समझ ने वाला. read more >>
मुसीबतो से बढ़ना हे आगे होसलों से लड़ना हे आगे, कुछ बनके हे दिखाना कल क्या होगा किसने जाना/ read more >>
हार मानने से मुसाफिर जीत नहीं मिलती, ठोकर खाके पीछे लोट जाने से तकदीर नहीं बनती, सपनों की उड़ान अभी बाकी हे होसलों में जान अभी बाकी हे, read more >>
चली आई मेरे आँगन में नंगे पाँव सूरज की पीली धूप/ उस आँगन को सुखाने जिसे निल्हा दिया था पूस की बरसात ने, चली आई मेरे आँगन में नंगे पाँ� read more >>
अति सुन्दर तुम फिर कुछ कह पाते/ न मुरझाते कभी न सरमाते कभी, अति सुन्दर तुम फिर कुछ कह पाते/ न खिलकर टूट पाते न गिरकर रूठ पाते, अति सु� read more >>
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