Anilkumar Rathwa (Sameer) 15 Dec 2025 कविताएँ समाजिक "परिवर्तन" 8264 0 Hindi :: हिंदी
परिवर्तन प्रकृति का अटल नियम है, यहाँ कुछ भी स्थायी नहीं—न लोग, न हालात। जो पीछे छूट गया, वो कहानी बन चुका, अब उसकी राख कुरेदना खुद को जलाना है, बस और कुछ नहीं बात। बीते कल का शोक मनाकर आज की ऊर्जा मत गँवाओ, जो हाथ से चला गया उसके लिए अपने सपनों को मत रुलाओ। वक़्त कभी लौटकर माफ़ी नहीं माँगता, वो सिर्फ़ इशारा करता है—अब आगे बढ़ो। जो आज तेरे पास है, वही तेरी असली पूँजी है, इसी से तेरी पहचान बनेगी, इसी से कल की बुनियाद रखी जाएगी। कम साधन, टूटे हालात, और थकी हुई हिम्मत— यही वो कच्चा माल है जिससे मजबूत इंसान गढ़े जाते हैं। लोग बदलेंगे, रिश्ते छूटेंगे, अपने भी कभी पराए लगेंगे, पर याद रखना— जो तुझसे चला गया वो तेरे क़ाबिल नहीं था, और जो आज भी तेरे साथ है वही तेरी लड़ाई का हिस्सा है। आँसू बहाने से किस्मत नहीं बदलती, मेहनत करने से हालात बदलते हैं। शिकायत करने से रास्ते नहीं खुलते, ख़ुद पर भरोसा रखने से मुक़ाम मिलते हैं। इसलिए सिर उठाकर चल, पीछे देखने की आदत छोड़, क्योंकि जो पीछे देखता है वो अक्सर आगे ठोकर खाता है। आज को पूरी ताक़त से जी, क्योंकि वर्तमान को जीतने वाला ही भविष्य पर राज करता है।