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सिलसिले-कितने बिखर गए युहीं चलते रहे सिलसिले

Raj Ashok 03 Jan 2024 शायरी हास्य-व्यंग सिलसिले 37569 0 Hindi :: हिंदी

एक नज्ब एक सवाल पर  
कितने बिखर गए 
यहाँ, युहीं चलते रहे सिलसिले
और लाखों मर गए ,
उलझने कम कहाँ हुई । जिन्दगी मे
लौग इघर के ऊघर गए ।

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