मोती लाल साहु 12 Apr 2023 कविताएँ समाजिक भावनाओं की ना जात बिरादरी माया तो छाया सपना है, निगोडी नाता है सब रूप सिंगार तक। झपट छीन बांट लेंगे सब माल और असबाब सो जाना पड़ेगा खाली हाथ, जिंदगी था अनमोल गवा दिया माया में सब मोल। 36353 0 Hindi :: हिंदी
भावनाओं की- ना जात बिरादरी, ना ही कोई रिश्ता नाता सब दिखावा- और छलावा माया तो, छाया सपना है निगोडी यह दुनिया- का है रूप जलवा, मेरा हुआ ना तेरा होगा नाता है सब- रूप सिंगार तक, झपट छीन बांट लेंगे सब माल और असबाब सो जाना पड़ेगा खाली हाथ जिंदगी था अनमोल, गवा दिया माया में सब मोल! -मोती