खिलौनों से खेलने वाला इंसान,
खिलौने की तरह बन गया है,
तूने खुद को समझाया ही नहीं,
सच है ये कि खिलौना बेजान है,
अभी भी जाग जा तू इंसान हैं,
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बस लब्ज है!!
दुख इतना है कि शायर बन गया,
दर्द इतना है कि घायल बन गया,
गुम हूं कहीं,
ठोकर खा, भटकता सा पागल बन गया,
कहां मैं उसके लायक बनने च� read more >>