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गम को भूलाने की बहाने बहुत की ---2 आलम में मुस्कुराना है , दामन में काटें को खिला के ---2 होठों में गुलशन को खिलाया हूँ , बहाने की बहुत तुझे भ� read more >>
कर निर्माण नीड़ो का और कहीं/ पतझड़ का मोसम जो बीत गया, पत्तों का रंग तो सूख गया, अंधेरों का कल में सोर नहीं, कर निर्माण नीड़ो � read more >>
धान उगेंगे मेघ गरजेंगे देखना गगन तुम जरूर/ बादलो को सूरज से पिघलाएंगे खेतो को पानी से नहलाएंगे, धान उगेंगे मेघ गरजेंगे देखना गगन तु read more >>
यह रूप मेरा है ऐसा प्रिय तुम्हें दिखा न् सकती हूँ। मेरे मन की पीड़ा प्रिय मैं तुम्हें सुना न् सकती हूँ।। फीके पड़ गए रंग मेंहदी के इसे read more >>
भारत के वीर जवानों को, करते हैं नमनः, शहीद हुए जो आजादी के लिए, हौसला था उनका दबंग। read more >>
प्रिय शाली जी दिन आपके ख्याल में गुजर जाता है, ख्याल इस तरह बढ़ जाता है कि हर आईने में आपका चहरा ही नजर आता है// read more >>
रह गई बंद अंधेरो मे न मिला रोशनी का चिराग कोई/ बुझ गई थी ढिभरी उसकी क्यो न आया जलाने कोई, उदास था मन जिसका वह थी बूढ़ी चन्दा, रह गई बंद अ� read more >>
खो जाती हूँ मैं कभी-कभी गुज़रे दिनों के ख्यालो में ... क्या होता अगर जी रहे होते हम आज भी अंग्रेजो के ज़माने में ... चाबुक खाते, धूल फ़ाख्ते � read more >>
गहरी अंधेरी रात के बाद, सुहानी भोर आती है जेष्ठ की तपिश के बाद, घटाएं घनघोर छाती हैं 'यह भी नहीं रहेगा' का भाव, दुःख का दुःख भुलाता है तू� read more >>
कुछ संकल्प नया, कुछ प्रकल्प नया तब अफसोस न होगा कि एक साल गया बीते साल कि कुछ गलतियां, या कुछ गलतफहमियां भुला दूं भीतर में जमीं वहमिया read more >>
वक्त यूं ही गुजर रहा कुछ पता ही नहीं चल रहा ज़िन्दगी जी रहे हैं या ढ़ो रहे हैं जाग रहें हैं या खुली आंखों से सो रहे हैं कुछ पा भी रहे हैं read more >>
हंसिये पर खड़ा हूं कहां जाऊं क्यों जाऊ इधर जाऊ की उधर जाऊ समझ में नहीं आ रहा है एक तरफ कुआं हैं तो एक तरफ है खाई कहां जाऊं बता ए जिन् read more >>
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