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मंत पुँछ, नशें मे, ... .. कैसे सालों तक मैं जीया ? हवा मे उड़ते छल्ले से ये घुंऐ के गुंबार किस्मत की बेरुखी , और अपनो के तानों ने ये नायाब श read more >>
आज की दुनियाँ में धोखे बाज कम नहीं, बाहर से दिखे मासूम अंदर वह विष रखे। बातें प्यारी-प्यारी करें और कर लेता वश में, फिर कर देता है अपन� read more >>
खुशी पर्व नवरात्रि की,पावन आया वक्त। माता के नौ रूप से,लहर चले है रक्त।। प्रथम शैल पुत्री तुझे,करूं नमन मैं खास। पूरे कर अरमान सब,और ब� read more >>
दिप्त्त दीप दान का, अभिमान नम करी! स्वेच्छ, ऊज्वला करी, चिरागों कि रौशनी!! ‌‌‌‌ विकाश का पवन बहे, अवकाश वक्त से! दिप्त्� read more >>
मैं वही दीप हूॅं मैं दीप वही,जो कल जलता था हर एक घर में कोने-कोने मुझे सजाया था हर कोई एक पंक्ति में एक कतार में अपने ही हाथों से मुझको read more >>
जीवन का .... शुरू ,सफर अब है ...... पहला कदम, पहली ड़गर .... अब है सिख रहे है। चलाना ,योही ... गिरते संभलते । नजरों के आगे ,जब अपनी माँ रहती है। चले। read more >>
आज संगम करेंगे विचारों का, आज संगम करेंगे कर्मों का। आज संगम करेंगे संस्कारों का, आज संगम करेंगे सभ्यता का। आज संगम है आरजू ओं का, read more >>
In halls of power, a game unfolds, Where tales of politics, their grip, it holds. Ideas clash, like thunder's roar, Ambitions rise on a shifting floor. Debates echo, a cacophony of voices, In the realm of choices, where power rejoices. A dance of interests, a complex ballet, In the political theater, where actors play. Promises woven in read more >>
ना अब कोई सीता है ना लक्ष्मण जैसा भाई बचा ना‌ सत्युग जैसा राम कोई पर रावण बन बैठे हैं आज सभी अपना परिवार भी पराया अब तो यहाँ हो गया इ� read more >>
सामाजिक छल - F-58 हूँ धन से गरीब, नहीं अन्न से गरीब, ना दिल से गरीब, गरीबी मेरी का यूं मजाक ना कर II हूँ हक हलाल का मालिक, दिल से जिया, खरी read more >>
हम अभ्यस्त हुए -59 शक्ति महिला, अरमान, फरमान, कर्ज दान ईमान सब त्रस्त हुए, रीत पुरानी, कुरीत जनानी, करें मन मानी, हम अस्त - व्यस्त हुए, चलत� read more >>
चलते चलते बात हुई, अधूरी नई वार्तालाप हुई, घर परिवार मिल कुछ बात हुई, व्यस्तता चलते आधी रात हुई, फिर भी कहाँ पूरी बात हुई ? चाहत मिलना ब� read more >>
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