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Rupesh Singh Lostom
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Rupesh Singh Lostom
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@ rupesh-singh-lostom
, Uttar Pradesh
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मैं आंधी हूँ
मेरा रफ़्तार देख ये मत सझना की मैं हार गया मैं आंधी हूँ आसानी से थमता नहीं दरखतों के दरख्त उखाड़ देता हूँ मेरे राश्ते में कभी मत आना �
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शीशे का बदन
शीशे का बदन मुखड़ा चमन नशीले नयन होठ प्यासा मै खाना जुल्फ धना घनघोर घटा चमके जैसे बिजली सा मन गर्दन सुराही दार तेरा अकड़ीली भडकेल�
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जुगनुओ का बसेरा
सुना सुना आशमान में चाँद तारों का डेरा उस में जग मग टीम टीम करता जुगनुओ का बसेरा खुला खुला आश्मान में पंक्षी करे कलोल रंग बिरंगे �
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राज नैतिकता कहा गई
प्रजा तंत्र पराजित लोकतंत्र के अनोखी अलौकिक उन्मूलन से लोकतान्त्रिक अधिकार का हो रहा खूब फायदा कुछ भी बोलो किसी को बोल दो चाहे र
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मोदी मोदी हर हर मोदी
मोदी मोदी हर हर मोदी मोदी मोदी घर घर मोदी मोदी चाहें सब हो जाये बिगड़ी बात झट से बन जाये कभी न करता माफ़ दुशमन को मोदी मोदी हर हर मोदी �
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अधंगे प्रयाश से
बक्त आज हैरान हैं इंसान के करस्तान से पल पल बदल रहा समय के रफ़्तार से काल भी सर्मसार हैं आदमी के काम से माँ बाप मजबूर हैं लाचार हैं �
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मैं जुगनू होता तो
जुगनू के जैसा हम होते तो कैसा होता दिन में जागते रात में चमकते न अँधेरे का डर न खौफ होता जाहा पाते जाते न किसी का भैये न कोई रोकने �
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आज भी
फूल और खिलता आज भी कलियाँ भी खिल खिलाती भवरें गीत सुनाते आज भी कोयलिया भी गुनगुनाती बगियाँ मुस्कुराती आज भी अगर हवा का झोका न आत�
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जी करता हैं यु ही
कहा भी न जाये सहा भी न जाये तू इस कदर बसी हैं दिल में की क्या बताऊ कैसे दिखाऊ बस इतना समझ ले तुझ बिन रहा भी न जाये तू रोज रोज हर रोज �
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मेरी जज्बातों को
अल्हड जवानी मदहोश नयन सुर्ख होठ प्यासा बदन बे खौफ अदा तेरा चंचल योवन मैं चुप रहूँगा तुम सुन लेन मेरे चाहत को इसारो में इशारों से स
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