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Rupesh Singh Lostom

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पता नहीं भाग रहे हैं बस भाग रहे किस लिए पता नहीं क्या चाहिए क्यों चाहिए किस के लिए पता नहीं सफर नया लोग बही सब दौड़ रहे बस दौड़ रहे न मं read more >>
रांझणा बिच बाजार हीर ढूंढे गीत गाए आज़ा हिरे कहा गई छोड़ बिच मजधार मनवा तरसे अशुआ बरसे बिन रुके बौछार भूखा तन बिचलित मन कब तक करे इंतजा� read more >>
जीबन बहुत कठिन हैं सफर बड़ा हैं लम्बा पथरीला जहरीला हैं जिंदगी के रास्ता कदम कदम पे ठोकर चलना बहुत जरूर हैं रुकना नहीं है हार के दुखों read more >>
हर तरफ झूठ हैं इश्क के बाजार में हुस्न सजा हैं मैं भी निकला हु नफरतों के बिच मोहब्बत बाटने पर हर तरफ दिल के हाट सजा हैं हर तरफ झूठ ह� read more >>
चलो चले कदम से कदम मिला के चलो चले देश के दुश्मनो को गले लगा के षड्यंत्र करते चलो चले अपने संगी साथिओं के संग कुछ उत्पातियों को ले� read more >>
मन के जंजीर मत डर मज़धार से तू कूद के उसे पार कर जीत होगा हौसले कि खुद को बुलंद कर तुम ही तस्कार हो और चमत्कार भी मत मांग उधर रोशनी रा� read more >>
चुपी जब मैं बच्ची थी माँ कहती चुप हो जा बचिच्यां इतना नहीं बोलती थोड़ी बड़ी हुई तब भी माँ ने ये ही कहा चुप हो जा लड़कियां इतना नहीं बो� read more >>
बक्त बे रहम जित गया हार गई फिर जिंदगी काल रूपी पिशाचनी ने छीन ली मेरी हर ख़ुशी पहले भावनाएँ अब छीन लिया जज्बात भी इस जिस्म का मैं क्य� read more >>
तू हवा के झोका बन छू बदन चला जाता मैं टक टकी लगाए देखता रहा तू सब उडा ले गया मेरी यादें कुछ वादे कसमे रस्मे तो उलझे सुलझे अजनबी जज� read more >>
शहर शहर हूँ मैं घूमता दिल तरहथि पे लिए कोई खरीद सकता हैं तो खरीद ले नहीं तो मेरे महबूब से मिला दे ये बिकाऊ नहीं हैं पर क्या बताऊ यार� read more >>
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