कच्ची सड़क ,हरे-भरे खेत,अगल बगल हरे-भरे घास...
खुला आसमां ,जोर जोर से बहती पुरवैया...
शोर शरावा तो बिलकुल भी नहीं...
वे गाँव कहलाते थे...
अब वे read more >>
लोग जीवन में दौड़ लगा रहे है,
दौड़नेवालो को पता नहीं वे कहाँ जा रहे है,
दौड़नेवालो को पता नहीं वे क्या खो और क्या पा रहे है,
दौड़नेवालो को पत� read more >>
थाली - "(एकता का पात्र , जिम्मेदारियों का वाहक )"
कहते है कि रोटी-कपड़ा-मकान मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है परंतु यह कदाच� read more >>
" मैं पैसा हूँ "
अरे ... मैं पैसा हूँ रुपया बनाता हूँ,
लोगों को उनकी औकात बताता हूँ ,
ज़रा तुम उस पुराने गुल्लक को तो तोड़ो जिसमे मैं अशोक read more >>
मन का सुकून कहीं बाहर नहीं मिलता ,
अपने अंदर खोजो वो मिल जायेगा I
मन का सुकून कहीं बाहर नहीं मिलता ,
कर्म बदलो आपको वो मिल जायेगा I
मन का स� read more >>