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कितने सुंदर, कितने प्यारे हैं ये रिश्ते मांगा जब मैंने खुदा, मिले मुझे ये फ़रिश्ते ।। मोहब्बत भर दे दिलों में, मिटा दें संकट क्लेश read more >>
कि बाट दिया इस धरती को क्या चाँद सितारो का होगा और नदियों के कुछ नाम रखे बहती धारो का क्या होगा कि शिव की गंगा भी पानी है आबेजमजम भी पानी read more >>
किसी बुनकर के चरखे की तरह, चरखा विचारों का घूमता है, बुनता रहता वो रात दिन ये मन रूपी धागा। धागा, जो धागा-धागा करके, एक पर्दा बन जाता ह� read more >>
अबला नारी शक्तिहीन, अपराधीत और भयभीत, धीरे-धीरे संघर्षों में ही गुम हो जाती है। समाज की जालीम नज़रों से बच्ची, सपनों की दुनिया में उलझ� read more >>
विधवा की आवाज़ काली रात छाती पर आवाज़ लगी, विधवा ने निहारा और विचलित हो गई। गहरी संध्या में उठा वीरान सा ध्वनि, उसकी माटी से निकली कु� read more >>
साक्षात्कार डॉ पीयूष गोयल यह साक्षात्कार बिंदेश कुमार झा द्वारा लिया गया है। जो मूल रूप से एक लेखक हैं। यह वर्ष 2023 में जुलाई माह में म� read more >>
हजारों दीप जल जाए तुम बस मुस्कुराना। निगाहें मेरी थम जाए तुम बस मुस्कुराना। दर्द जब भी बढ़े कि सीना चीर जाए हौसला उससे मिलने का कभी read more >>
नाहीं ज़िंदगी पतंग है कि कट जाएंगे। नाहीं राह अनजान है कि गुम जाएंगे।। जब साईं का ठिकाना ही हर घट में है। तो जनाब मंज़िल भी तन में ही � read more >>
"तू कहता है ईश्वर- एक है धरती एक है,,है ना"..! "तो देश-जात और धर्म- सब कुछ एक ही हुआ,,है ना"..!! -मोती read more >>
"मेरा तुम्हारा नाता- क्या इस जीवन के खेल में"..! "देश-धर्म-जात-भेद- क्या इस जीवन के खेल में"..!! -मोती read more >>
कांश मैं- समझ पाता व़क्त को, समझा था व़क्त मेरा था,, मैं था ही बेखबर-इस, व़क्त के हाथों में मेरा व़क्त था..!! -मोती read more >>
हीरा- पाया था ज़िंदगी, समझ पाया न गुर,, राह मिला- सतगुरु प्यारे, सीख पाया न गुर..!! -मोती read more >>
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