यू ही में कभी घूमने निकल जाता हू
ऊब जाता हू अपने आप से तो घर से निकल जाता हूं
सफर करता हूं बस में तो नईं बात संजो लेता हूं
ओर देखने जा रह� read more >>
गीत(मुखड़ा)
मेरे मन के अंँधेरे में, तू ही तो रोशनी है
जीवन के हर मोड़ पर, तेरी ही बंदगी है
दिल की आंँखों से देखूंँ, बस तुझको हरदम
तू ही म� read more >>