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चिंगारी जलाये रखो
कुछ भी हो मुस्कुराते रहो हालत अच्छे हो या बुरे खुद को आजमाते रहो बक्त के साथ साथ बदल जायेगा बक्त भी बस समय समय पे खुद को खुद से मिला�
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क्यों खत्म हुआ
पक्षियों का चहचहाना क्यों खत्म हुआ सुभप्रभात के पावन बेला में कहा गुम कोयलिया के गीत पपिहा के मनमोहक नृत्य बाबू जी के सुबह सुबह के �
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वक़्त
वक़्त बदलते देर नहीं लगती हमसफ़र साथ हो तो जिंदगी का सफर काटना मुश्किल नहीं लगती। धन्यवाद
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बेवफाई
तोड़ कर रख दिया तेरी मोहब्बत ने तूने बेवफाई की जख्म हमने खा लिया धन्यवाद
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राह
किसी की राह जींदगी बनाती हैं। किसी की राह जींदगी तबाह कर देती हैं। जिसकी राह सही होती हैं उसको दुनिया जीता देती हैं।
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होली
होली के दिन आई रंग बिरंगी खुशियां लाई साहित्य लाइव के मंच को मेरा हार्दिक शुभकामनाएं होली की । Happy Holi धन्यवाद
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बहार
सरदियांं खत्म होते ही बहार बसंत रतु आ जाती है। हमारे देश में फेबृवरी मार्च में बहार आती हैं। सुबह में चिड़ियों
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वक्त
1). हम गुजर चुके हैं उस वक्त से, जब हम भी आबाद थे, थे नाम हमारे भी कुछ, पर अब हो गए बेनाम थे। 2). क्या थी वह समय की ख़ासियत, जो बदल गई ह�
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हवा
हलकी फुलकी हु। वजन में कम ही रेहती हु। जहाभी जाती हु सुकून दे आती हु। जब जब गर्मी आती हैं प्यारसे मुझे बुलाते हैं मेरी एक झलक के लिए ना
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रंग ना होते तो केसा होता
ख्याल आया एकबार रंग ना होते तो दुनिया केसी होती। १९५७ के फिल्मों जैसी होती। सात रंगो वाला इंद्रधनुषभी होता बे रंग। ना होता कोई काला �
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तलाश
तलाश कुछ बक्त गुजर गए खुद को जानने में कुछ समय निकल गए गलतियों को मानने में और कुछ बक्त गुजर गए खुद को तराशने में और जो बाकि बचा नि
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मतभेद
जब लड़के पढ़ने के लिए पटना जाते है , जब वह तीन या चार साल रह जाते हैं । तो गरजीवन लड़के से यह नहीं पुछते की बेटा नौकरी हुआ या नहीं।। वही �
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