*अनोखा मिलन*
शरारत की भी सीमा होती है...
पता नहीं कोई हया लिहाज नहीं है इनमें...
तीन वर्षीय अनीश को गोद में उठाए सीमा बड़बड़ाती हुई बालकनी स read more >>
मेरे मे ना था वो खूबी मुझे सुधार दिया
मेरा ना होकर भी अपनापन जता दिया
ऐ दोस्त टूटे ना ये यारी
ज़ब तक जान मे हो जान
अंतिम सांस तक हो ये यार� read more >>