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व्यंग- 2000 का नोट,! रचना- जितेन्द्र शर्मा तिथि- 20-05-2023 व्यंग- परम प्रिय 2000 के नोट! सात वर्ष की अल्पायु में आपके अवसान की सूचना मिली। इस हृदय व read more >>
एक लड़की अपने बूढी दादी के साथ बरामदे में बैठी थी तभी वहां उसका बॉयफ्रेंड आ गया लड़की अपने बॉयफ्रेंड से क्या आप रामपाल यादव की बुक Da read more >>
हम वो कागज है। जरा सी बूंद पानी से गल जाते है। मगर कोई नाव बना दे। तो उस पार भी ,चले जाते है। हम वो कागज है। सीने पे चले कलम तो, अखबार,क� read more >>
आँचल के आँच से पिघल जायेगा तेरा कोमल नाजुक बदन अंगड़ाई लेती बे खौफ बेखबर नयेन किसी दिन भाग जाएगी ले के चैयन निगोड़ी जुल्फ तेरी बदनाम read more >>
कविता -कागज और नोट बचपन में पढ़ने का या अच्छा कुछ करने का मन कहां? और कब? होता है। पर मां समझाती थी एक ही बात बताती थी पढने से कुछ करन� read more >>
हम शराबियों का गम कोई क्या समझे , जो दुख झेले वही समझे अच्छे खासे थे जिंदगी में, जी रहे थे मजे में बोतल हमारी टूट गई अब तो हम जी रहे हैं स� read more >>
बहुत गम थे जिंदगी में हमने थोड़ी सी दारू जो पीली, अरे थोड़े पैसे कम पड़ रहे थे तो उधारी की पीली, जब घर लौटे इलाज करवा कर अपना तब बीवी चप्� read more >>
समोसा तेरी याद में हम तो चटनी खाते रह गए जब समोसा आया तो चटनी न थी तो तुम दोनों के बिछड़ जाने से मेरी आंखें नम थी। read more >>
उस शाम में अलग ही बात थी ,हो रही हल्की सी बरसात थी, फिजाओं में अलग ही नमी थी वहां बस समोसे की कमी थी. read more >>
र्मद पकाबे खाना, मेहरारू जोते खेत। भैया हो, बदल गइल बा जमाना।। read more >>
बच्चें मन के सच्चे... बचपन में याद है ….. अब इस तरह का आशीर्वाद कम ही मिलता है….. जब कोई रिश्तेदार व परिवार वाले हमारे घर आते थे तब फल व ख� read more >>
हम बचपन में छुट्टी के बाद खाना खाते ही शुरु हो जाते थे..... फिर जब शाम को वापस खाने का समय होता तब ही वापस घरों को रूख करते थे। आजकल के बच� read more >>
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