Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

स्पंदित मन

Santosh kumar koli ' अकेला' 15 Jul 2024 कविताएँ समाजिक स्पंदित मन 29320 0 Hindi :: हिंदी

मन ताल जल को, 
स्थिर करो। 
चंचल इंद्रियों के तर्ष को, 
बधिर करो। 
कंकड़ अकड़ हाज़िरी की, 
खातिर करो। 
पानी, पानीय है, 
मत रुधिर करो। 
प्रक्षेपित कंकड़, 
तल में जमा करो। 
प्रक्षेपक को मन से, 
क्षमा करो। 
जल की कल में, 
मन से रमा करो। 
सूखी नदी से, 
मत उपमा करो। 
मन को विचलित करता, 
हल्का हवा का झोका। 
हवा का काम हवा करती, 
नौका का काम नौका। 
खुद का खुद पर वश नहीं, 
हवा को किसने रोका? 
मनकना, 
स्पंदन क्रंदन होगा, 
जीवन का झरोखा।

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: