संदीप कुमार सिंह 26 Jun 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी रोमांचित होंगें। 40736 0 Hindi :: हिंदी
(मुक्तक छंद) तूं है मेरी लैला मैं हूं तेरा छैला। अब उम्र भर टागूं सदा मैं प्यार का थैला। और तनिक भी मुँह से आह कभी ना निकले_ तेरे लिए भरता रहूं पानी का घैला। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....