प्रवीण कुमार 10 Oct 2025 कविताएँ समाजिक 15882 0 Hindi :: हिंदी
सच अभी कहां सामने आऐ। जांच भी तो अधूरी है। बात भी तो अधूरी है। कहानी -सी ही शुरू होती है। लेकिन कहीं पर शुरूआत भी अधूरी है। सच अभी कहां सामने आए। तकलीफ तो सामने नहीं। करने -2 के इल्ज़ाम है। सुनने वाला भी अजनबी। सुनाने वाला भी कहीं अजनबी। सच अभी कहां सामने आए। कुछ लोगों को इंतजार भी रहता है - ऊंट किस तरह बैठता है -(परिणाम या फैसला)। ऊंट भी वो जिसका स्वामित्व एक नहीं। किसी का कहना,सुनना। किसी की मजबूरी भी, किसी के लिए ज़रुरत ही। सच अभी कहां सामने आए।