प्रवीण कुमार 09 Oct 2025 कविताएँ बाल-साहित्य 9753 0 Hindi :: हिंदी
आंसूओं -सी मेंहदी देखीं।
मेरी नटखटी उम्मीदों को रंग देती।
अब बचपन वाला मन है साथ
हर खुशी झूमने के लिए
अब मुझे मजबूर कहती।
हर कल अपना होगा
आश्व़त हूं, शायद अब तक ।
लेकिन अब से आगे नहीं,
जो कि जैसे सच है ।
सहर्ष परिश्रम से मुझे मिले
हर नेक मुकाम-ए खुशी!
मेरे रब ज़िन्दगी!