Santosh kumar koli ' अकेला' 08 Jul 2024 कविताएँ समाजिक ऊंट और झूठ 28615 0 Hindi :: हिंदी
थमा न थमेगा, ऊंट, झूठ का चक्का। मौका़ मिलने पर दोनों, लंबा मारते छक्का। ऊंट, झूठ अंत में, दोनों भागते मक्का। पकड़ा पथ छोड़े नहीं, कच्चा हो या पक्का। ऊंट, झूठ दोनों में, छाता मद। चकाबू में पड़ने पर, दोनों आते हद। दोनों ने कुदरत से, पाया लंबा कद। दोनों को ही नहीं चाहिए, सरकारी सनद। ऊंट, झूठ नहीं जानते, पकड़ने पर छोड़ना। बिदकने पर बचना मुश्किल, कितना ही मोड़ना। अड़ने, बिगड़ने पर, मुश्किल है झंझोड़ना। दोनों देते मौके़ पर काम, आना चाहिए सहेजना।