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मनोदशा मजदूर की-दृढ़ उसमें है जोश

संदीप कुमार सिंह 28 Jun 2023 कविताएँ अन्य मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 34299 0 Hindi :: हिंदी

(दोहा छंद)
मनोदशा मजदूर की,दृढ़ उसमें है जोश।
साहस रखता खूब है,हरदम रखता होश।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍🏼
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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