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मां का आंचल अवर्णित है

Radheshyam Joshi 05 Jan 2026 कविताएँ बाल-साहित्य 8604 0 Hindi :: हिंदी

धूप घाम में यह छाता है,
रोने लगे तो रूमाल।
मां का आंचल अवर्णित है,
यही मां का कमाल।।

नींद आयी तकिया बनकर,
बेटे को सुलाया।
मां ने आकर आंसू पोंछे,
जब जब किसी ने रुलाया।

दर्द से राहत दिलाए,
गर्म फूंक से सहलाया।
बेटा जब गंदा हो के आया,
गीला कर नहलाया।।

मां का आंचल सर से सरके,
तन अपना ढंक जाता।
बच्चों के जीवन में पल्लू,
कायनात बन जाता।।
-राधेश्याम जोशी कोहिणा

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