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कानून का नूर

Santosh kumar koli ' अकेला' 24 Jun 2024 कविताएँ समाजिक कानून का नूर 28328 0 Hindi :: हिंदी

लीक- लीक कीक में, 
कभी-कभी रहती कमी। 
लीक से बेलीक ना होते, 
तो दुनिया रहती दबी थमी, 
असल नसल गई मसल, 
फल फूल रहा क़लमी, 
खुला दिमाग़ फले- फूले, 
बंद दिमाग़ वज्र वहमी। 
कई -कई  थामते, 
हर वक्त कानूनी पूंछ। 
पूंछ को ही बनाते, 
अपनी हेकड़ी मूंछ। 
हर जगह कानूनी पूछ से, 
मूल भाव भिचता कूंच। 
कानूनी खेत में, 
हर व्यक्ति होता ऊंछ
कभी-कभी, 
लीक से हट देखो। 
कानून की कोख का, 
घट देखो। 
नियम, कानून, सिद्धांत, 
शरण का वट देखो। 
मूल भाव का भाव लगाओ, 
कानून का मत लठ देखो।

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