प्रवीण कुमार 09 Oct 2025 कविताएँ समाजिक 5529 0 Hindi :: हिंदी
कोई ख़ुशी होती है। अपनों के बीच में ही अपने के होने की शुरुआत। अकेले से मन जाती ख़ुशी। हां,मनाई जाती सब के साथ। कोई ख़ुशी होती है। दिन पर रात के होने में सुबह की शाम के होने में छिपीं -2 रह गई कोई ख़ुशी कहीं हमारे -तुम्हारे पास। कोई ख़ुशी होती है। प्रयास और हर उम्मीद की पहचान करते -करवाते कोई ख़ुशी होती है। हमारे -तुम्हारे पास। कोई ख़ुशी होती है। मैंने , तुमने अब तक तो जाना है। जन्म पर खुशी होती है मृत्यु के लम्हें में कहिए,खाश! अपनों के बीच में ही अपने के होने की शुरुआत। कोई ख़ुशी होती है।