Santosh kumar koli ' अकेला' 18 Sep 2024 कविताएँ समाजिक जरूरी तो नहीं 28796 0 Hindi :: हिंदी
जरूरी तो नहीं। हर जाम को महफ़िल मिले, हर राही को मंज़िल मिले। हर कश्ती को किनारा मिले, खोया अवसर दुबारा मिले। जरूरी तो नहीं। हर नदी को समुद्र मिले, हर गुणी को क़द्र मिले। हर कली को अलि मिले, हर मौत को श्रद्धांजलि मिले। जरूरी तो नहीं। हर फूल को सुगंध मिले, हर व्यक्ति को आनंद मिले। हर शमा को परवाना मिले, हर चोंच को दाना मिले। जरूरी तो नहीं। हर ज़मीं को बीज मिले, हर रूठे को चीज़ मिले। हर कवि को पहचान मिले, हर पर को उड़ान मिले। जरूरी तो नहीं। हर भक्त को भगवान् मिले, हर परिंदे को खुला आसमान मिले। हर गुल को गुलशन मिले, हर सावन को यौवन मिले। जरूरी तो नहीं। हर मोती को हार मिले, सबको मां-बाप का प्यार मिले। हर योद्धा को जीत मिले, हर छत को भीत मिले। जरूरी तो नहीं। जरूरी तो नहीं।