Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

स्त्री

Madhur garg 09 Oct 2024 कविताएँ अन्य 26283 0 Hindi :: हिंदी

है कौन जानती है ,
किस घर जाएगी,  वो एक दिन ।
बाबुल के आंगन से निकल,
सासरे का वंश बढ़ाएगी एक दिन ।
आई वो घड़ी जब उसका विवाह हुआ,
पत्नी बन पति के घर आई वो एक दिन ।
सुबह को जल्दी उठना उसको सीखना पड़ा,
शाम में कभी जल्दी सो न  पाई वो एक दिन ।
समय बदल गया दिन बदलते गए,
घर वाले न बदल पाए उसके लिए एक दिन ।
काम करती सुबह से शाम तक वो रोज है,
पर घूमने को बाहर निकाल ना पाई एक दिन ।
दिल में ही रह गए उसके सारे अरमान,
देखे थे जो सपने  उसने जाग एक दिन ।
कभी अच्छी डिश तो कभी अच्छी सफाई,
पर मन से जिंदगी जी न पाई वो एक दिन ।
आया वो समय, के जब बनी थी वो मां,
सोचा था  जीवन अब बदल जाएगा एक दिन।
किंतु उसकी परवरिश में दिन गुजर गए,
आराम की सांस बैठ पाई न वो एक दिन ।
होता है कितना मुश्किल जीवन स्त्री का,
पर समाज में कभी वो सम्मान न पाई एक दिन ।
 
वास्तव में बदल गया है जमाना,
पर फिर भी सोच है बहू के लिए वही,
कि बहू न बदल जाए कही किसी की एक दिन ।

सभी माताओं,बहनों को कोटि कोटि प्रणाम

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: