Madhur garg 09 Oct 2024 कविताएँ अन्य 26283 0 Hindi :: हिंदी
है कौन जानती है , किस घर जाएगी, वो एक दिन । बाबुल के आंगन से निकल, सासरे का वंश बढ़ाएगी एक दिन । आई वो घड़ी जब उसका विवाह हुआ, पत्नी बन पति के घर आई वो एक दिन । सुबह को जल्दी उठना उसको सीखना पड़ा, शाम में कभी जल्दी सो न पाई वो एक दिन । समय बदल गया दिन बदलते गए, घर वाले न बदल पाए उसके लिए एक दिन । काम करती सुबह से शाम तक वो रोज है, पर घूमने को बाहर निकाल ना पाई एक दिन । दिल में ही रह गए उसके सारे अरमान, देखे थे जो सपने उसने जाग एक दिन । कभी अच्छी डिश तो कभी अच्छी सफाई, पर मन से जिंदगी जी न पाई वो एक दिन । आया वो समय, के जब बनी थी वो मां, सोचा था जीवन अब बदल जाएगा एक दिन। किंतु उसकी परवरिश में दिन गुजर गए, आराम की सांस बैठ पाई न वो एक दिन । होता है कितना मुश्किल जीवन स्त्री का, पर समाज में कभी वो सम्मान न पाई एक दिन । वास्तव में बदल गया है जमाना, पर फिर भी सोच है बहू के लिए वही, कि बहू न बदल जाए कही किसी की एक दिन । सभी माताओं,बहनों को कोटि कोटि प्रणाम