Amit Kumar Ranjan 03 Aug 2024 कविताएँ समाजिक 62182 0 Hindi :: हिंदी
🌹 गोदी मीडिया 🌹
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हिंदू मुस्लिम मिलजुल रहते,
|यह नहीं दिखलाते हो तुम
जाति धर्म की आड़ में,
दिन रात आग लगाते हो||
दर्द गरीबों का आज,
नजर न तुमको आता है |
चीखें,आह निकल रही है,
पता ना तुम्हारा किससे नाता है ||
हीरो बने तुम निकले थे,
गुमनामी में कही खो गए तुम |
पूरा देश गर्त में जा रहा,
पता ना तुम किसके हो गए||
महंगाई,गरीबी,बेरोजगारी,
तुम्हारे चैनल से दूर हो गया |
अब तो एक इंसान बनो,
जमीर तुम्हारा किधर सो गया ||
इतना मत झूठ बोल अब,
कि सच भी शर्मान लगे
सच्चे,निडर,पत्रकार की बात छोड़ो,
तुम गोदी मीडिया कहलाने लगे अब ||