प्रवीण कुमार 12 Oct 2025 कविताएँ बाल-साहित्य 10104 0 Hindi :: हिंदी
एक दिन ओर जन्म -दिन.... सबकी विकल्प सोच में बदलने का एक खाश दिन। नियम तो नहीं, पर नयापन लाने की कोशिश भी। एक दिन ओर जन्म -दिन.... पर इसके वास्ते वक्त निकालना ही पड़ गया है। आज तो नहीं पर, साल में एक दिन। पहले तो नहीं पर, अब अच्छा लगने लग गया है। एक दिन ओर जन्म -दिन.... साल तो बितता ही है, लेकिन खुश रहने का बहाना नहीं। छोटी -सी मुस्कुराहटों में, रिश्तों में इकट्ठापन लाने की; ज्योति नज़र आई। हां! शरारतों का छोटा -सा जादू है। जिसमें कुछ क्षण के लिए ही सही। हो रहा है -बेकाबू-सा है। एक दिन ओर जन्म-दिन....