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दीपक-प्रकृति प्रकृष्ट सार से

Santosh kumar koli ' अकेला' 21 Dec 2023 कविताएँ समाजिक दीपक- जीवन 20922 0 Hindi :: हिंदी

प्रकृति प्रकृष्ट सार से,
बना दीपक।
स्निग्ध, बाती, जोत,
रखा प्रदीपक।
तेल, बाती संयोजन से,
प्रज्वलित धक-धक।
दीपन, मापन, रोधन,
हस्त समापक।
प्रकाश प्रकीर्ण,
पथ झिलमिल।
दीप्त सार से तमाविष्ट,
जीवन गया खिल।
न हसद, न हसरत,
चीरता तमाच्छन्न दिल,
स्निग्ध क्षरण, हरण,
तिल -तिल।
परहित जीवन समर्पित,
स्वयं घिरा तम से।
तेरा -मेरा संयत,
 भरा भाव सम से।
स्वार्थ स्वाहा, कृतार्थ,
जीवन अच्छा हमसे।
जगत् रीत, तेल गया बीत,
अमर सुकरम से।

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