Dr Satywan Saurabh 05 Apr 2023 कविताएँ धार्मिक 33191 1 5 Hindi :: हिंदी
*भूल गए हैं राम* सहकर पीड़ा आदमी, हो जाता है धाम । राम गए वनवास को, लौटे तो श्रीराम ।। रात हलाला नेक है, उठते नहीं सवाल । राम नाम की दक्षिणा, पर क्यों कटे बवाल ।। मंदिर-मस्जिद बांटते, नफरत के पैगाम । खड़े कोर्ट में बेवज़ह, अल्ला औ' श्रीराम ।। भूल गए हम साधना, भूल गए हैं राम । मंदिर-मस्जिद फेर में, उलझे आठों याम ।। बन जाते हैं शाह वो, जिनको चाहे राम । बैठ तमाशा देखते, बड़े-बड़े जो नाम ।। वक्त न जाने कौन तू, वक्त बड़ा बलवान । भेजे वन में राम को, हरिश्चंद्र श्मशान ।। जपते ऐसे मंत्र वो, रोज सुबह औ' शाम । कीच-गंद मन में भरी, और जुबाँ पे राम ।। उगते सूरज को करे, दुनिया सदा सलाम । नया कलेंडर साल का, लगता जैसे राम ।। राम राज के नाम पर, कैसे हुए सुधार । घर-घर दुःशासन खड़े, रावण है हर द्वार ।। -डॉo सत्यवान सौरभ