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आसरौ छोड़ सासरै आई

Radheshyam Joshi 10 Feb 2026 कविताएँ समाजिक 5958 0 Hindi :: हिंदी

आसरौ छोड़ सासरै आई,
बेटी बण नैं रीत निभाई।
बाबोसा घर लाड़ लड़ाई,
सासरियै में प्रीत निभाई।
मैं बेटी हूं जुगा जुगा सूं,
पण बेटै सूं लारै कद ही?
- राधेश्याम जोशी कोहिणा

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