Santosh kumar koli ' अकेला' 30 Aug 2024 कविताएँ समाजिक आंकड़ा 24792 0 Hindi :: हिंदी
शहर में विस्फोट के, सुनो समाचार। अलग-अलग जगह बम फटे, बम फटे दो-चार चालीस के चिथड़े उड़े, मृतक सौ के पार। साठ इलाज दौरान मरे, आंकड़े जुटा रही सरकार। देश, दुनिया के अख़बारों में, यही रेल पेल। ये है आंकड़ों का खेल। भरी बस कार पर चढ़ी, बैलेंस गया बिगड़। कज किसी का नहीं, ट्रेन पर ट्रेन गई चढ़। देवस्थान, बाबा कथा में, मच गई भारी भगदड़। हज़ारों मरे, सैकड़ों डरे, वीडियो बना रहे आड़े पड़- पड़। बच्चियों के बचपन लूटने पर, कब लगेगी नकल? ये है आंकड़ों का खेल। पढ़ने वालों के लिए, यह महज़ एक ख़बर है। सोचो आंकड़ों का, किस-किस पर कितना असर है। जिसकी गोद उजड़ गई, उसकी क्या डगर है। बूढ़ा बाप, बिलखते बच्चे, उनको किसकी सबर है। उसकी भी सोचो जिसकी जोड़ी का, बिछड़ गया बैल। ये है आंकड़ों का खेल। ये है आंकड़ों का खेल