महफिल में कमी ना थी - SANTOSH KUMAR BARGORIA

महफिल में कमी ना थी     SANTOSH KUMAR BARGORIA     कविताएँ     दुःखद     2022-07-03 19:56:11     इस कविता के माध्यम से कवि लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं की हमें जिन दोस्तों पर सबसे ज्यादा गर्व था जिन पर सबसे ज्यादा विश्वास था उन दोस्तों को कुछ दुश्मनों से मिलता देख मुझे बेहद दुख हुआ। में भल     33288           

महफिल में कमी ना थी

महफिल में कमी ना थी, 
दोस्तों की लेकिन ।
चंद दुश्मनों से जाकर, 
कुछ दोस्त मिल चुके थे ।।

वे जो नजरे मिलाने से भी, 
कभी कतराते थे हमसे ।
साथ पाकर मेरे दोस्तों का, 
मुझसे बेख़ौफ हो चुके थे ।।

मेरे साथ रच रहे थे, 
वो बस षड़यंत्र पे षड़यंत्र ।
अपनी नाकामी पर भी वो बस, 
मुझको ही दोष रहे थे ।।

वो तो भला हो मेरे उन दुश्मनों का,
जो हमें सिर्फ नुकसान पहुंचना चाहते थे
संतोष ।
वर्ना दोस्त तो हमें, 
जान से मारने की ही सोच रहे थे ।।
           
          🙏धन्यवाद 🙏

                                                          संतोष कुमार
बरगोरिया 
                                                        ---------------------------------
                                                            (साधारण जनमानस) 

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