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सपनों से किया प्यार

Pratibha Khadekar 11 Sep 2025 गीत दुःखद प्रतिभा खडेकार 16427 0 Hindi :: हिंदी

सपनों से किया प्यार..
               रचना -प्रतिभा खडेकार 
                    ,,,7517947668
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
,,,,,,,,, सपनों से किया प्यार 
,,,,,,,,, अपनों ने दिया है ठुकरा 
,,,,,,,,,, घर में दिया जलाने वाला चाहे कुछ भी करें 
,,,,,,,,,, घर में तो है उसी का ही नाम 
,,,,,,,, धन परायो बिटिया ब्या दि जावें 
,,,,,,, घर का कुल चलाने वाला चाहे हो शराबी, चाहे हो बेकार 
,,,,,,,,, सपनों को तोड़ किसी के हवाले कर जावे 
,,,,,,,,, घर चलाने लायक बना दे, जो करे बाबुल का नाम 
,,,,,,,,, सपनों से किया प्यार 
,,,,,,,,,,,, अपनों ने दिया है ठुकरा 
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
,,,,,,,,,,,, कदम आगे बढ़ने पर, साथ ना कोई 
,,,,,,,,,,,,, तय करनी है अकेले ही मंजिल 
,,,,,,,,,,,, जब रोशन हो दुनिया में तालिया की गड़गड़ाहट 
,,,,,,,,,, तब सब अपनों को रिश्ता याद आवे 
,,,,,,, हाथ मिलाने की चाहत ,गले लगाने को मन चाहे 
,,,,,,,,, जब अकेले मंजिल पर निकल चुके थे , तब कहा थे अपने
,,,,,,,,,,, सपनो को चूर कर चुके थे हम, तब कहा थे अपने 
,,,,,,,,,, ताने मार हमारे आसू न देख सके ,तब कहा थे अपने
,,,,,,,,,, सपनों से किया प्यार 
,,,,,,,,,, अपनों ने दिया है ठुकरा 
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
,,,,,,,,,,,,,,,, बलिदान बगैर कुछ हासील नही होता 
,,,,,,,,,,,,,,,, वो जो वहा बैठा है, वो छिन लेता बलिदान तब तक फल नही देता 
,,,,,,,,,,,,,,,, देर है अंधेर नही मगर छिन कर ओ उजाला करता है 
,,,,,,,,,,,,,,,, सपनों से किया प्यार 
,,,,,,,,,,,,,, अपनों ने दिया है ठुकरा..

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