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कैसी खुशी कैसा ग़म

Pratibha Khadekar 25 May 2025 गीत देश-प्रेम प्रतिभा खडेकार 27067 0 Hindi :: हिंदी

कैसी खुशी कैसा ग़म 
                       ,,,,,, प्रतिभा खडेकार 
                       ,,,,,,,7517947668

,,,,,,,,,हर किसी को अपना दर्द दिखाई देता है ...
,,,,,,, हर किसी को अपनी खुशी दिखाई देती है...
,,,,, क्या सच में हर मुस्कान पर अंदरूनी खुशी है...
,,,, या भितर छुपा कहीं गहरा दर्द...
,,,, जो खुशी में लहरा रहा अपना वतन...
,,,,, हर हाथों में थमा झेंडा अपने मुल्क का...
,,,,,,,  ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
,,,,,,, उतरे हुए चेहरों पर ए कैसी हसी...
,,,,,,,,कैसी खुशी कैसा ग़म...
,,,,,,,,,  ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
,,,,, नारा वतन का ले रहा अपनों की जान... 
,,,,,,, जो रहते हैं मुल्क के उस पर....
,,,,,,,, रो रही है जमीन.. देख रहा आसमान..
,,,,,,, खून कि ए नदी, ढूंढ रही गंगा में पानी..
,,,,,,,, कहां ढूंढ लाऊं गंगा का पानी...
,,,,,,, मन के भीतर समाई पानी में गंगा...
,,,,,,, ,,,,,,,, ,,,,,,,, ,,,,,,, ,,,,,,,,, ,,,,,,,,,,,,,
,,,,,,, कैसे दिखाऊं गम के आंसू मेरे...
,,,,,,, जहां झूम रहा मेरा वतन... मेरा वतन मेरा वतन..
,,,,,,,,, ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
,,,,,,,,, उतरे हुए चेहरों पर ए कैसी हंसी..
,,,,,,,कैसी खुशी कैसा ग़म....
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
,,,,,,, खेल रहे हर कदम एक दूजे के खून से होली 
,,,,,,,ऐ मेरा मुल्क, ऐ तेरा मुल्क...
,,,,,,, जहां मेरा कोई, तेरा कोई हो रहा दहन....
,,,,,,, कैसे बुझाऊं आग जहां की, कहां करूं दफन...
,,,,,,हा हा हा हा, हा हा हा हा, हा हा हा हा हा...
,,,,,,,, किस जहां में मनाऊ खुशी की दहन..
,,,,,,, बिखरा हुआ मिलेगा चिंधी जैसा जिस्म....
,,,,,,,, रोते हुए......स्वर.........
,,,,,,,, खता एक हो जो,, हजारों जुल्म दे..
,,,,,,, ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
,,,,,,,, उतरे हुए चेहरों पर ए कैसी हंसी...
,,,,,,, कैसी खुशी कैसा ग़म......
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

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