मोती लाल साहु 14 Jun 2025 ग़ज़ल दुःखद खामोशी में- #in silence- ग़ज़ल -#gazal- गुढ़ बात- #the mystery thing- खोज- explore- प्रेरणा- #motivation- शायरी- #poetry- आत्मज्ञान- #self knowledge- मोती- #Moti 15802 0 Hindi :: हिंदी
खामोशी में भी जो गुढ़ बात कह जाए, वो अश्क आंँखों से मोती बन बह जाए। रिश्तों की डोरें, सांँसों की एक सरगम, इक पल में ही सब कुछ कितना सह जाए। उम्मीद की किरणें, हर सवेरा बन कर, अंधेरों से लड़कर, मन बहला जाए। खोया क्या पाया, यह खेल है जीवन का, मिट्टी का पुतला, मिट्टी में ही रह जाए। सांँसों का दिया है, कब तक जलेगा ये, हर पल की कीमत है, कोई समझ जाए। गहराई है इतनी क्या डूबोगे इसमें? जो तैर गया, वो दरिया बनकर बह जाए? -मोती