मोती लाल साहु 28 Aug 2025 ग़ज़ल अन्य सफर_ए_जिंदगी 11549 0 Hindi :: हिंदी
हर पल उड़ते ख़्वाबों के परिंदे, अनंत है अंबर, कोई ठिकाना नहीं। न जाने कौन सी मंज़िल पे रुकना है, ये फ़ैसला तो, अपने हक़ में नहीं। ज़िंदगी एक सफ़र चलने का नाम, कब कहांँ है अंत, इसका पता नहीं। ये दुनिया तो है एक सराय, रिश्ता यहांँ कोई, अपना नहीं। सब छूट जाता है जो भी मिला, ये जग भला किसी का, होता नहीं। मौत-ए-तन तो बस एक ठहराव है, रूह को तो कभी, रुकना आता नहीं। -मोती