Nihal singh 26 Dec 2025 ग़ज़ल समाजिक #ग़ज़ल #समाज #सच #राजनीति #हिंदी_शायरी #निहाल # सच का सामना 10996 1 5 Hindi :: हिंदी
अब तक ज़ेहन-ओ-दिल में यही पैकार रहा है
जला है जो घर, उसमें कोई ग़द्दार रहा है
वो जो कहते थे ये ज़मीं माँ है हमारी
शायद वही इस देश का गुनहगार रहा है
थूका हुआ चाट, खुश हैं बहुत से
जो ज़ुबाँ पर डटा, वही खुद्दार रहा है
सच बोल कर जा रहा है जेल तो क्या
वो ता-उम्र झूठ का गुनहगार रहा है
फ़िरऔन के साथी हैं साहिब-ए-मसनद
एक-एक वार उनका असरदार रहा है
एक सवाल ने पूरे माशरे को हिला दिया
लगता है सवाल ही असरदार रहा है
जो अच्छे दिन आने थे, वो चल रहे हैं निहाल
फिर जाने क्यों इस सच से तू इंकार रहा है
- निहाल
यह ग़ज़ल सामाजिक चेतना और सच के पक्ष में एक सवाल है।
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4 months ago