मोती लाल साहु 25 Oct 2025 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत इश्क़-ए-हक़ीक़ी, तसव्वुफ़, अल्लाह का ज़िक्र, ईश्वर प्रेम, रुहानी, नशा-ए-इबादत, तन्हाई में ख़ुदा, मोती नज़ीर 14023 0 Hindi :: हिंदी
करूँ मैं ज़िक्र उसी का, करूँ मैं फ़िक्र उसी का, मेरी हर साँस में शामिल है असर सिर्फ़ उसी का। उसी के नाम से रौशन है दिल की हर इक गली, ज़मीं की क्या, कि फ़लक तक है सफ़र सिर्फ़ उसी का। ये जन्नत-ए-जहांँ, ये रौनक़ें, ये सारे नज़ारे, हर एक शै में जो मग़्लूब है, हुनर सिर्फ़ उसी का। न मय से वास्ता, न साग़र से कोई मतलब, नशा है रूह में और दिल पे असर सिर्फ़ उसी का। ये दुनिया है फ़क़त एक आज़माइश का मुक़ाम, हर इक इम्तिहाँ में अब है सब्र-ओ-गुज़र सिर्फ़ उसी का। ग़म-ए-हयात हो या फ़र्हत-ए-जहान कोई भी, नज़र में मेरी है मंज़िल, ख़बर सिर्फ़ उसी का। वही है आरज़ू-ए-दिल, वही है जुस्तुजू-ए-जाँ, 'नज़ीर' की है ये दुनिया, है घर सिर्फ़ उसी का। -मोती