Anilkumar Rathwa (Sameer) 21 Jan 2026 ग़ज़ल अन्य मेरी धड़कनों की आज़ादी 10565 0 Hindi :: हिंदी
मतला: जिस दिन सफ़र का आख़िरी मोड़ आएगा, वो क़दम मेरा ही होगा। आज की धड़कनों को आज़ाद रहने दो, ये जीवन मेरी रूह का सपना होगा। शेर 1: भीड़ की राह पर चलना आसान बहुत है, पर अपनी राह बनाना जुनून माँगता है। जो अपने डर से रोज़ लड़ना सीख गया, वही हर हाल में मजबूत होगा। शेर 2: लोग तय करेंगे मेरे कल का नक़्शा, ये मुझे मंज़ूर नहीं, ये फ़ैसला मेरा है। मेरे हौसलों की स्याही से लिखा हुआ, मेरा हर आने वाला पन्ना होगा। शेर 3: थक कर भी जो खड़ा रहे तूफ़ानों में, वही असली जीत का हक़दार कहलाए। हर चोट जो सीने पर सजाता गया, वही मेरी ताक़त का गहना होगा। शेर 4: ज़ंजीरों की आदत नहीं मेरी साँसों को, मुझे खुला आसमान चाहिए उड़ने को। जो झुक गया डर के साए में एक बार, वो उम्र भर बोझ ढोता होगा। मक़ता: “अनिल” अपनी ज़िंदगी अपनी शर्तों पर, लिखता रहेगा वक़्त की किताब में नाम। जब तक लहू में चलती है आग सपनों की, हर दिन मेरा एक नया इम्तिहान होगा।