मोती लाल साहु 02 Sep 2025 ग़ज़ल अन्य #सतगुरु #रूह #सद्गुरु की रहमत #जीवन #सुख #शांति #अध्यात्म #सद्गुरु शरण #भक्ति #ग़ज़ल #मोती 30742 1 5 Hindi :: हिंदी
ज़िंदगी को मिल गई है अब, सद्गुरु के दरबार में, पा लिया है रूह ने पनाह, अब इस ज़िंदगी के सफ़र में। नज़र जब से मिली है तुझसे, मन की हर उलझन थम गई, राहें दिखती हैं साफ़ अब, इस दुनिया के हर डगर में। गुम थे हम, कई जन्मों के अंधेरों में, अब तो रौशनी ही रौशनी है, इस ज़िंदगी के हर पहर में। सूखे से पेड़ में, आई है फिर से जान, जैसे मिली हो बारिश, अब इस ज़िंदगी के बंजर में। मिल गया है अब किनारा, इस भँवर से हमें, सद्गुरु, तेरी रहमत की नाव में, उतर गए हम इस सागर में। मिल गई है मंज़िल हमें, इस लंबी राह की, अब सुकून ही सुकून है, इस रूह के सफ़र में। -मोती
9 months ago