जूल्फ एक घटा - संदीप कुमार सिंह

जूल्फ एक घटा     संदीप कुमार सिंह     ग़ज़ल     प्यार-महोब्बत     2021-09-26 14:57:56     मेरी ये गजल , गजल प्रेमियों के दिल को छू जायेगा।     24411        
जूल्फ एक घटा

जूल्फ एक घटा है,यह प्यार की निशानी,
कदमों के जब बजे पाजेब,
दोनो की विशाल है यह दास्तान।
बहुत नाजुक नूरे जवी पपिया,
कमर तक आती उसकी चोटी
धुनों का साज छेड़ती उसकी पाजेब,
दिलों के सागर में तरंगों की 
बहार आ जाती है।
थामे नहीं थमती, झलक अपनी दिखला,
मानो घटा सी आसमानों में खो जाती है।
एक जूल्फ़ कल उसका हंसी और मजाक
में मेरे हाथों आ गया।
उसकी महक आज भी बरकरार है,
दिल मेरा अभी भी बेकरार है।
               चिंटू भैया

Related Articles

शादी से पहले और शादी के बाद - नमन कुमार कवि
शादी से पहले और शादी के बाद - नमन कुमार कवि

लड़का: शुक्र है भगवान का इस दिन का तो मे कब से इंतजार कर रहा था। लड़की : तो अब मे जाऊ? लड़का : नही बिल्कुल नही। ल

जिंदगी
जिंदगी

हर पल ये जिंदगी भी कोई खास नही होती किसी अजनबी से मिलने की आस नहीं होती रिस्ते अगर टूटे तो जुड़ जाते है दोबारा दिल जब

दुल्हे की परछाई
दुल्हे की परछाई

मोह के नए धागे में जुड़कर खुशियां तेरे नाम कर आई, मोड़ के मुख सखियों से तेरे लिए खेल खिलौने सब बिसराई, खोल के दिल का


Please login your account to post comment here!

© 2021 | All rights reserved by Sahity Live® | Powered by DishaLive Group