Shiv Kishore 26 May 2023 ग़ज़ल प्यार-महोब्बत मेरी गज़ल,हमारी गजल, प्रेमियों की गज़ल, झकझोर देने वाली गज़ल 34123 0 Hindi :: हिंदी
जो खो गई थी मुझसे वह मेरी किताब थी , जो तुम्हें मिली नसीब से वह मेरी किताब थी , जो पढ़ न पाई तुमने अधूरी सी रह गई _ वह मेरे जीवन की प्यारी मेरी किताब थी । बस,थोड़ी सी रह गई थी लिखने को दास्तां , कि हुई अचानक मेरी तबियत खराब थी ! दिन गुजरे कई अर्से गुजरे संभली न जिंदगानी , तब जर्जर हड्डी बन गई मेरी क़बाब थी ! रोता रहा तन्हाइयों में कुछ आरजू लिए * किशोर* , तब आंसू को ढकने चेहरे पर मेरी नक़ाब थी ! __ शिव किशोर,शाहजहांपुर,यू.पी Wh .no -6388630922