मोती लाल साहु 28 Aug 2025 ग़ज़ल अन्य खोज, प्रेरणा, भक्ति, उद्गार, भाव, अनुभव, आत्मज्ञान, शायरी, मोती 14699 0 Hindi :: हिंदी
इस जग से न्यारा है ठाकुर मेरा, प्यार सबका दुलारा है ठाकुर मेरा। हर ग़म का अब इक ही सहारा है, हर दिल का किनारा है ठाकुर मेरा। हर दश्त में उस तक है इस्तखारा, हर आँख का नज़ारा है ठाकुर मेरा। कहाँ रे तू छुपा है सबकी नज़रों से, बड़े भाग्य जो पाए भेद वो-ए-तेरा सिद्धांत। -मोती