Anilkumar Rathwa (Sameer) 02 Feb 2026 ग़ज़ल अन्य “हिस्सा ही सही” 5314 0 Hindi :: हिंदी
किसी को अपनी पूरी दुनिया बनाना ठीक नहीं, वो साथ तो चले, मगर मेरी ज़मीन कहीं नहीं। रिश्तों की उड़ान हो खुली हवा की तरह, एक ही पर टिकी रहे मेरी ज़िंदगी वहीं नहीं। मैं भी रहूँ मैं, मेरी भी हो एक पहचान नई, तेरी ही परछाईं में ढल जाऊँ, सही नहीं। दिल में बसे तू, ये सच है, इससे इनकार नहीं, मगर खुद को ही खो दूँ तेरे लिए, कहीं नहीं। हर मोड़ पे साथ हो, यही तो दुआ है मेरी, पर मेरी पूरी दुनिया बस तू ही बने, यहीं नहीं। “अनिल” ने सीखा है दर्द से इतना सा सबक, प्यार हो रोशनी, पर खुद की लौ बुझे, सही नहीं।