मोहब्ब निगाहों से पढ़ी जाती है,
जरूरी नही 'जिक्र-ए-अल्फ़ाज' हो.!
हुनर होगी तो ये जान जाओगे,
किस हद तक 'दिल-ए-ख़ास' हो..!!
✒️मनीष सिंह 'क्षत्रिय read more >>
यूं ही नहीं मिलती मंजिल, ठोकरें खाकर चलना होगा ।
कठिन पड़ाव पार कर , अपने मंजिल की ओर बढ़ना होगा ।।
बार- बार लगातार हार होने पर ,भी और कोश read more >>
मै तेरे प्यार में पागल तो नही ।
मै तेरे दिल के जमीदार तो नहीं ।।
एक बार चांस देकर तो देख,।
एक बार पलट करके तो देख,।।
मै आपको बताऊं कैसे आप read more >>