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Laxmi nishad
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लाल छाता
पानी बरसा छम - छम - छम ऊपर छाता नीचे हम । छाता लेकर निकले हम, पैर फिसला गिर गए हम।।
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भारत वंदना
भारती,जय विजय करे। कनक शस्य् कमल धरे । लंका पदतल सतदल, गर्जितोमिरृ् सागर - जल धोता शुचि चरण युगल स्तव कर बहु अर्थ भरे !
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भरोसा
जिन्हें अपने आप पर भरोसा होता है, उनका मुकाबला बस अपने आप के साथ होता है ।
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सीख
जिस दिन आपने ये सीख लिया की सीखते कैसे हैं फिर आप कुछ भी जीत सकते हो ।
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जिंदगी
हँसते रहो सदा हँसने में क्या गम है, दुनिया में परेशानी किसको कम है, खुशी - खुशी बिताओ यह जिंदगी अपनी, क्योंकि इसी का नाम कभी खुशी कभी �
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समय
समय के साथ बदल जाओ, या फिर समय बदलना सीख लो, कभी भी किस्मत को मत कोसो , हर हाल में सम्भलना सीख लो।
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प्रेरणा
मंजिल मिले ना मिले, ये तो मुकदर की बात नहीं। हम कोशिश भी ना करें, ये तो गलत बात हैं----। जिंदगी जख्मों से भरी हैं, वक्त्त को मरहम ब�
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जिंदगी
दो पल की जिंदगी हैं, आज बचपन ,कल जवानी, परसों बुढ़ापा, फिर खत्म कहानी है। चलो हंस कर जिए , चलो खुलकर जिए , फिर ना आने वाली यह रात सुहानी, �
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प्रकृति
सुंदर रूप इस धरा का, आँचल जिसका नीला आकाश, पर्वत जिसका ऊँचा मस्तक, उस पर चाँद सूरज की बिन्दियो का ताज । नदियों - झरनों से छलकता यैवन, �
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माँ
जब अकेला रहा तो उसकी याद आयी, अँधेरे में था तो उसकी याद आयी। जब भूख लगी तो उसकी याद आयी, नींद नहीं आयी तो उसकी याद आयी। सोचने में कितन
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