Laxmi nishad 25 Jul 2024 कविताएँ देश-प्रेम भारत वंदना 44205 0 Hindi :: हिंदी
भारती,जय विजय करे। कनक शस्य् कमल धरे । लंका पदतल सतदल, गर्जितोमिरृ् सागर - जल धोता शुचि चरण युगल स्तव कर बहु अर्थ भरे ! तरु -तृण - वन - लता वसन, अंचल में खचित सुमन, गंगा ज्योतिर्जल - कण धवल धार हार गले! मुकुट सुभ्र हिम - तुषार , प्राण प्रणव ओमकार, ध्वनित दिशाएं उदार, सतमुख शतरव मुखरे!