विराम चिन्ह का प्रयोग - रोhit Singh

विराम चिन्ह का प्रयोग     रोhit Singh     आलेख     बाल-साहित्य     2021-09-22 10:36:31     #रोhitSingh #विराम_चिन्ह #poetry #painkiller #हिंदीव्याकरण #Hindi #motivational     14035        
विराम चिन्ह का प्रयोग

विराम चिन्ह् का प्रयोग


आपने अक्सर किसी किताब,कहानी,अखबार,लेख आदि। को पढ़ते समय या लिखते समय विराम चिन्ह को वाक्य तथा भाषा के अंत में अवश्य ही देखा होगा। या स्वयं आपने विराम चिन्हों का प्रयोग भी किया होगा। विराम चिन्ह का प्रयोग किसी भी भाषा तथा किसी वाक्य को पूर्ण रूप से पढ़ना तथा समझने के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। कहे तो जिस प्रकार एक स्त्री के सिंगार में उसका आभूषण की बहुत ही महत्वपूर्णता होती है। ठीक उसी प्रकार भाषा तथा वाक्यों के लिए भी विराम चिन्ह उनकी महत्वपूर्णता है। अगर मुख्य तौर पर कहे तो बिन विराम चिन्ह के वाक्य तथा भाषा को समझना बहुत ही कठिन है। क्या आप जानते हैं। कि विराम चिन्ह कितने प्रकार के होते हैं। तथा उनका प्रयोग किस वाक्यों के लिए और किस समय किया जाता हैं। अगर आप नहीं जानते तो कोई बात नहीं यहां हम कुछ महत्वपूर्ण विराम चिन्ह की चर्चा करेंगे। जिससे आपको विराम चिन्ह को समझने वा प्रयोग करना करने में आसानी होगी।


( 1 ) अल्पविराम (Comma) : अल्पविराम का प्रयोग वाक्य के पूर्ण होने के बाद कुछ देर के लिए विराम के लिए किया जाता है। अल्पविराम के चिन्ह् को दर्शाने के लिए कोमा ( , ) का प्रयोग किया जाता है ऐसे कुछ निम्नलिखित वाक्य हैं जिनमें हम अल्पविराम का प्रयोग करते हैं। जैसे कि -

( क )  जब हम एक ही शब्द भेद के तीन या उससे अधिक शब्दों का वाक्य में एक साथ प्रयोग करते हैं। जैसे कि - राहुल, रोहित, मोहित, और रवि आज स्कूल नहीं आए।

( ख )  बहुत सारे शब्दयुग्मों का जब हम वाक्य में प्रयोग करते हैं। तो अंतिम को छोड़कर पूर्व तक के शब्दयुग्मों के बाद अल्पविराम का प्रयोग होता है। जैसे - दिन-रात, सुख-दुख, जीवन-मृत्यु सब ईश्वर की देन है।

( ग )  किसी वाक्य के संबोधन के बाद किया गया विराम चिन्ह का प्रयोग कुछ इस तरह है। ' रमेश तुम्हें क्या पसंद है '

( घ )  उक्ति के बाद  'कि'  के स्थान पर अल्पविराम का कुछ इस प्रकार प्रयोग किया जाता है। जैसे- 'पिताजी कहते हैं, की चोरी करना पाप है।'

( च )  यदि वाक्य के बीच में पदांश या वाक्यखंड आ जाए तो दोनों छोर पर अल्पविराम का प्रयोग होता है। जैसे - 'लालच, चाहे जैसा भी हो मनुष्य को क्षति पहुंचाता है '

यदि जब उद्देश्य बहुत लंबे हो तो वाक्यखंडों के बीच 'और' का लोप होने जैसी स्थितियों में अल्पविराम का प्रयोग होता है।

( 2 )अर्धविराम ( Semi Colon ) : जैसा कि अभी हमने अल्पविराम के बारे में पढ़ा है। अल्पविराम की अपेक्षा जहां अधिक ठहराव अपेक्षित हो। वहां अर्धविराम का प्रयोग होता है। अर्धविराम के चिन्ह् को दर्शाने के लिए सिमी कॉलिंग ( ; ) का प्रयोग किया जाता है जैसे-

'व्यक्ति का व्यक्तित्व किस प्रकार ऊंचा हो ;  व्यक्ति का मानसिकता समाज के साथ जुड़ा हो, उन में समानता का विकास हो; मन में सदा प्रेम की भावना हो, और वह अपने समाज की नीतियों पर अपना अमल कायम रखें।,

(3) उपविराम ( Colon ) : अर्धविराम की अपेक्षा जहां अधिक रुकावट अपेक्षित हो, और साथ ही वाक्य जैसे समाप्ति अपेक्षित न हो। वहां उपविराम का प्रयोग होता है। उपविराम के चिन्ह् को दर्शाने के लिए कॉलिंग ( : ) का प्रयोग किया जाता है। पुस्तक, निबंध आदि के शीर्षक में उपविराम का प्रयोग अधिक किया जाता है।

जैसे - उदाहरण: मोहन आज स्कूल नहीं आया। प्रसाद : विचार और विश्लेषण

( 4 )पूर्णविराम ( Full Stop ) : जहां वाक्य या मनोभाव पूरा हो जाए। वहां पूर्णविराम का प्रयोग किया जाता है। पूर्णविराम के चिन्ह् को दर्शाने के लिए फुल स्टॉप ( । ) का प्रयोग किया जाता है। जैसे-

( क )   बच्चा रो रहा है ।

( ख )  चुनिया खेल रही है।

( ख )  चिड़िया आकाश में उड़ रही हैं।


( 5  ) प्रशनवाचक ( Introgression ) : प्रशनवाचक प्रशनसूचक वाक्य के अंत में आता है। कोई ऐसा वाक्य जिसमे किसी व्यक्ति से किसी व्यक्ति द्वारा प्रशन का भाव हो। उस वाक्य के अंत में प्रश्नवाचक चिन्ह् का प्रयोग होता है। प्रशनवाचक के चिन्ह् को दर्शाने के लिए इंट्रोग्रेशन (? ) का प्रयोग किया जाता है। जैसे- 

( के )  क्या राम स्कूल गया..?

( ख )क्या तुमने खाना खाया..?


(6) विस्मयादिबोधक  ( Exclamation ) :  उत्साह,आनंद,आश्चर्य, घृणा आदि। भावों को व्यक्त  करने के लिए विस्मयादिबोधक विराम चिन्ह् का प्रयोग किया जाता हैं। विस्मयादिबोधक के चिन्ह् को दर्शाने के लिए ˌए᠎̮क्‍स्‌क्‍लˈमेश्‌न्‌ ( ! ) का प्रयोग किया जाता साथ ही विस्मयादि‌ शब्दों के बाद भी इसका प्रयोग होता है जैसे-

( क )   वाह !

( ख )  ओह !

( ग )    अरे !

( 7 )  संयोजक  ( Hyphen ) : संयोजक चिन्ह् का प्रयोग किसी दो शब्दों का जब एक साथ प्रयोग हो तो  उन दोनों शब्दों के बीचो-बीच एक छोटा सा समांतर चिन्ह डैश का प्रयोग किया जाता है।‌ संयोजक के चिन्ह् को दर्शाने के लिए ˌहाइफ़न ( ! ) का प्रयोग किया जाता हैं। साथ इसके कुछ उदाहरण जैसे-

( क ) दो विपरीतार्थक शब्दों के बीच ( ऊंच-नीच )

( ख ) सहचर शब्दों के बीच ( खान-पान )

( ग )  प्रतिबिम्बित शब्द और आर्थिक शब्द के बीच ( अनाप-शनाप )

( घ )   द्वंद्व समास के दोनों भेदों के में पदों के बीच ( रामा-कृष्णा )

(च )  जब संज्ञा की पूर्णरूकित हो ( गांव-गांव )

इन सभी स्थितियों में संयोजक चिन्ह (-)का प्रयोग होता हैं।





Related Articles

नारी नही नारायणी है
नारी नही नारायणी है

नारी नही नारायणी है –नारायण की अर्धांगनी है। हे नारी तेरे रूप अनेको,तू ही माई तू जग में अवतारी है। कितनी करुणा क

आजकल के रिश्तों में कोई प्यार नहीं
आजकल के रिश्तों में कोई प्यार नहीं

आजकल के रिश्तों में कोई प्यार नहीं इसलिए रिश्ते बनाने का कोई अधिकार नहीं लोग मतलब की दुनिया में इस तरह लीन हो गए

धूप और मेघ की लड़ाई
धूप और मेघ की लड़ाई

एक बार मेघ आ रही है, तो एक बार धूप आ रहा है। यह आंख_मिचौली का खेल, सुबह से चल रहा है। मुझे लगता आज दोनों में ठनी है, एक द


Please login your account to post comment here!

© 2021 | All rights reserved by Sahity Live® | Powered by DishaLive Group