श्री गणेश जन्मोत्सव - Uma mittal

श्री गणेश जन्मोत्सव     Uma mittal     आलेख     धार्मिक     2021-09-22 11:03:41     श्री गणेश जन्मोत्सव     14768        
श्री गणेश जन्मोत्सव

  भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को श्री गणेश भगवान का जन्मदिन मनाया जाता है| सभी देवी देवताओं में सर्वप्रथम पूजे जाने वाले भगवान श्री गणेश जी को कौन नहीं जानता| श्री गणेश भगवान की पूजा सभी देवी देवताओं से पहले की जाती है नहीं तो किसी भी देवी देवता की पूजा का फल नहीं मिलता| ऐसा भगवान गणेश को माता पार्वती के आग्रह पर सभी देवी देवताओं से वरदान प्राप्त है| श्री गणेश भगवान की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है| कोई भी शुभ कार्य हो तो पहला निमंत्रण पत्र श्री गणेश जी को भी जाता है क्योंकि कहा जाता है श्री गणेश जी हर कार्य को बिना किसी  बाधा के पूरा कर देते हैं| तभी इनको विघ्नहर्ता अर्थात बाधाओं का नाश करने वाला भी कहा जाता है| गणेश जी की दो पत्नियां जिनके नाम रिद्धि और सिद्धि हैं और उनके दो पुत्र शुभ और लाभ है| गणेश जी की पूजा करने से रिद्धि सिद्धि शुभ लाभ सभी अपने आप प्राप्त हो जाते हैं| श्री गणेश भगवान जी को मोदक बहुत प्रिय हैं| इन्हें बुद्धि का देवता कहा जाता है| गणेश भगवान जी सचमुच बहुत बुद्धिमान विवेकशील माता पिता के आज्ञाकारी दयालु हर कार्य में निपुण है| श्री गणेश भगवान जी बुद्धि और विद्या के देवता के साथ-साथ एक महान लेखक भी हैं| एक बार की बात है कि श्री वेदव्यास जी को महाभारत पुराण वेद उपनिषद को काव्य और छंद में लिखने का आदेश हुआ ताकि यह ज्ञान  लुप्त ना हो जाए| तब श्री वेदव्यास जी भगवान शिव जी के पास गए और उन्होंने भगवान से कहा कि मुझे कोई ऐसा बुद्धिमान मिल जाए जो मेरे बोले हुए काव्य और छंद को शीघ्रता से समझ समझ कर लिख पाए ताकि कोई त्रुटि भी ना रह पाए क्योंकि अगर मैं रुकूंगा तो कहीं कोई श्लोक भूल ना जाऊं भोलेनाथ आप मेरी सहायता करें| तब भगवान शिव जी ने उसी समय अपने पुत्र गणेश जी को बुलाया और गणेश जी को श्री वेदव्यास जी के साथ लेखन क्रिया के लिए भेज दिया| श्री गणेश जी तुरंत अपने वाहन मूषक के साथ श्री वेदव्यास जी के साथ गए और लिखने लगे| वेदव्यास जी शीघ्रता से   बोलते गए और गणेश जी शीघ्रता से लिखते गए और लिखते लिखते  उनकी कलम ही समाप्त हो गई| तब उन्होंने अपना एक दांत जल्दी से निकाल कर उससे ही स्याही में डुबो कर कलम बना ली और बिना रुके सारी रचना कार्य पूरा किया| तभी से श्री गणेश भगवान को  एकदंत भी कहा जाने लगा| श्री वेदव्यास जी गणेश जी की प्रतिभा बुद्धिमानी त्याग  धैर्य और माता पिता के प्रति इतना  आज्ञाकारी आदि गुणों को देखकर आश्चर्यचकित  और प्रसन्न हो गए| श्री गणेश भगवान ने अपनी बुद्धिमानी से अपने माता-पिता का गौरव और भी बढ़ाया| ऐसे भगवान को हमारा कोटि-कोटि प्रणाम| श्री गणेश जन्मोत्सव पर कुछ भक्त सारा दिन उपवास रखते हैं और कुछ लोग जाप भी करते हैं| श्री गणेश जन्मोत्सव का उत्साह देखते ही बनता है| 
उमा मित्तल 
राजपुरा टाउन (पंजाब) 

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